Vrat me kya khaye aur kya na khaye: देखिए, अगर आप व्रत रखने की सोच रहे हैं या पहले से रखते आ रहे हैं, तो सबसे पहले एक बात समझ लीजिए व्रत सिर्फ भूखा रहने का नाम नहीं है। कई बार हम बिना सही जानकारी के व्रत शुरू कर देते हैं और फिर दिनभर कमजोरी, चक्कर या घबराहट महसूस होती है। तब लगता है कि व्रत रखना मुश्किल है। लेकिन सच यह है कि अगर सही तरीके से किया जाए तो व्रत शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद होता है।
हमारी परंपरा में व्रत का खास महत्व है। चाहे बात हो भगवान शिव की पूजा की, माता दुर्गा के नवरात्रि व्रत की या भगवान विष्णु के एकादशी व्रत की हर व्रत का अपना नियम और महत्व होता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि Vrat me kya khaye aur kya na khaye, ताकि व्रत भी सही तरीके से हो और सेहत भी बनी रहे।
अक्सर लोग सोचते हैं कि व्रत का मतलब पूरा दिन कुछ भी न खाना है। जबकि असल में व्रत का मतलब है सात्विक और हल्का भोजन लेना, ताकि शरीर को आराम मिले और मन पूजा में लगे। अगर सही चीजें खाई जाएं तो कमजोरी नहीं होती, बल्कि शरीर हल्का और शांत महसूस करता है।
इस लेख में हम आपको बिल्कुल आसान और रोजमर्रा की भाषा में समझाएंगे कि Vrat me Kya Khaye, कौन-सी चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए, कौन-से फल और आटा व्रत में सही माने जाते हैं, और व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान कैसे रखें। ताकि अगली बार जब आप व्रत रखें, तो पूरा दिन बिना परेशानी के निकाल
व्रत का सही अर्थ और उसका महत्व
व्रत शब्द संस्कृत के उपवास से जुड़ा है, जिसका मतलब है भगवान के पास बैठना या मन को पवित्र करना। व्रत का उद्देश्य सिर्फ भोजन त्यागना नहीं, बल्कि मन को शांत करना और बुरी आदतों से दूर रहना होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत रखने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कई लोग सोमवार को शिव जी के लिए, मंगलवार को हनुमान जी के लिए, गुरुवार को विष्णु भगवान के लिए और नवरात्रि में माता रानी के लिए व्रत रखते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखा जाए तो समय-समय पर हल्का भोजन या फलाहार करना शरीर के लिए अच्छा माना जाता है। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। इसलिए व्रत रखते समय सही खान-पान बहुत जरूरी है, ताकि शरीर कमजोर न पड़े और व्रत का पूरा लाभ मिले।
Vrat me kya khaye aur kya na khaye आसान नियम
जब भी आप व्रत रखते हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि व्रत का मतलब खुद को भूखा रखना नहीं, बल्कि शरीर और मन को हल्का और शुद्ध रखना है। आम दिनों में हम गेहूं, चावल, दाल और रोजमर्रा के मसाले खाते हैं, लेकिन व्रत के दौरान इन चीजों से परहेज किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि व्रत में सात्विक और हल्का भोजन लेने की परंपरा है।
बहुत लोग बिना जानकारी के कुछ भी खा लेते हैं और फिर कहते हैं कि व्रत में कमजोरी हो गई या पेट खराब हो गया। असल में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। Vrat me kya khaye aur kya na khaye यह जानकर ही व्रत रखें, ताकि सेहत भी बनी रहे और पूजा का पूरा फल भी मिले।
हर व्रत के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं। जैसे सोमवार, एकादशी या नवरात्रि में खान-पान के तरीके बदल जाते हैं। इसलिए जिस भगवान के लिए व्रत रख रहे हैं, उसके नियम पहले जान लेना समझदारी होती है।
व्रत में क्या खाएं
व्रत में हमेशा हल्का, सात्विक और आसानी से पचने वाला खाना लेना चाहिए। फल सबसे अच्छा विकल्प माने जाते हैं। केला तुरंत ताकत देता है, सेब पेट साफ रखता है और पपीता पाचन के लिए अच्छा होता है। आप दिन में 2 या 3 तरह के फल आराम से खा सकते हैं।
दूध और दही भी व्रत में खाए जा सकते हैं। दही से पेट ठंडा रहता है और दूध शरीर को ऊर्जा देता है। साबूदाना से बनी खिचड़ी या खीर पेट भर देती है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देती।

कुट्टू का आटा और सिंहाड़े का आटा व्रत में रोटी या पूरी बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। राजगिरा और मखाना भी बहुत फायदेमंद होते हैं। मखाने को हल्का भूनकर खा सकते हैं। मूंगफली भी ऊर्जा देती है, लेकिन ज्यादा मात्रा में न खाएं। नमक की जगह हमेशा सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें।
व्रत में क्या न खाएं
व्रत के दौरान कुछ चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। सबसे पहले सामान्य नमक से बचें, क्योंकि व्रत में केवल सेंधा नमक ही मान्य होता है। हल्दी, धनिया, गरम मसाला जैसे रोजमर्रा के मसाले भी नहीं डाले जाते। प्याज और लहसुन को तामसिक माना जाता है, इसलिए व्रत में इनका सेवन नहीं किया जाता। गेहूं, चावल और सामान्य दालें भी अधिकतर व्रत में वर्जित होती हैं।

फास्ट फूड, पैकेट वाले स्नैक्स और ज्यादा तला-भुना खाना भी नहीं खाना चाहिए। कई लोग व्रत के नाम पर बहुत ज्यादा तली हुई चीजें खा लेते हैं, जिससे पेट भारी हो जाता है। तामसिक भोजन यानी ऐसा खाना जो शरीर में आलस और भारीपन बढ़ाए, उससे दूर रहना चाहिए।
व्रत का असली मकसद मन को शांत रखना है, इसलिए सादा और सात्विक भोजन ही लें। हमेशा याद रखें कि हर व्रत के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए जिस देवी-देवता के लिए व्रत रख रहे हैं, उनके अनुसार खान-पान के नियम जरूर जान लें।
Vrat me Kya Khaye फल और ड्राई फ्रूट्स का सही चुनाव

- व्रत के दौरान फल सबसे सुरक्षित और हल्का भोजन माना जाता है।
- केला तुरंत ऊर्जा देता है, सेब फाइबर से भरपूर होता है और पपीता पाचन ठीक रखता है।
- ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, काजू, किशमिश और अखरोट शरीर को ताकत देते हैं।
- लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए, क्योंकि इनमें कैलोरी अधिक होती है।
- नारियल पानी भी व्रत में बहुत फायदेमंद होता है।
- यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और कमजोरी नहीं आने देता।
- अगर दिनभर भूख ज्यादा लगती है, तो थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फल खाते रहें।
- इससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है और चक्कर नहीं आते।
व्रत में साबूदाना, कुट्टू और सिंहाड़ा क्यों खाया जाता है?
व्रत के दौरान हमारा शरीर पूरे दिन सामान्य खाने से दूर रहता है, इसलिए ऐसी चीजें खानी जरूरी होती हैं जो हल्की भी हों और ताकत भी दें। साबूदाना इसी वजह से सबसे ज्यादा खाया जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या खीर के रूप में खाया जाता है और इसे खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती।

कुट्टू और सिंहाड़े का आटा भी व्रत में इसलिए इस्तेमाल होता है क्योंकि ये सामान्य अनाज की श्रेणी में नहीं आते। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत में गेहूं और चावल नहीं खाए जाते, इसलिए इनके स्थान पर कुट्टू और सिंहाड़ा लिया जाता है। इनसे बनी रोटी, पूरी या चीला पेट भरने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं।
सिंहाड़ा ठंडक देने वाला माना जाता है और पाचन के लिए अच्छा होता है। वहीं कुट्टू में फाइबर और प्रोटीन भी पाया जाता है, जो शरीर को संतुलित ऊर्जा देता है। ध्यान रखें कि इन्हें ज्यादा तेल में तलने की बजाय हल्का बनाकर खाएं। इससे व्रत भी सही रहेगा और सेहत भी ठीक रहेगी।
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व्रत में किन चीजों से पूरी तरह बचें?
व्रत का असली मकसद शरीर और मन को शुद्ध रखना होता है, इसलिए कुछ चीजों से पूरी तरह बचना जरूरी है। सबसे पहले प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। इन्हें तामसिक माना जाता है और व्रत में सात्विक भोजन ही लिया जाता है। सामान्य नमक की जगह केवल सेंधा नमक ही उपयोग करना चाहिए।
मसालेदार और ज्यादा तीखा खाना भी व्रत में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे पेट में जलन और एसिडिटी हो सकती है। फास्ट फूड, बाजार की तली-भुनी चीजें और पैकेट वाले चिप्स से भी दूर रहना चाहिए। ये चीजें शरीर को भारी बनाती हैं और व्रत का आध्यात्मिक महत्व कम कर देती हैं। इसके अलावा ज्यादा चाय या कॉफी पीना भी सही नहीं है। कोशिश करें कि सादा, हल्का और घर का बना भोजन ही लें। इससे शरीर स्वस्थ रहेगा और व्रत का पूरा फल भी
व्रत के दौरान पानी और तरल पदार्थ का महत्व
- कई लोग व्रत में पानी कम पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है।
- कोशिश करें कि दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
- नींबू पानी (सेंधा नमक के साथ), नारियल पानी और दूध भी ले सकते हैं।
- तरल पदार्थ शरीर को ऊर्जा देते हैं और कमजोरी से बचाते हैं।
- व्रत के दौरान शरीर को अंदर से साफ और संतुलित रखना बहुत जरूरी होता है।
- अगर पानी कम पिया जाए तो सिर दर्द, चक्कर और थकान महसूस हो सकती है।
- हर 1 से 2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीना बेहतर रहता है, एक साथ ज्यादा पानी न पिएं।
- नारियल पानी शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी करता है और तुरंत ताजगी देता है।
- अगर पूरा दिन फलाहार कर रहे हैं तो भी पानी की मात्रा कम न करें।
- गर्मियों में व्रत रखते समय तरल पदार्थ और भी ज्यादा जरूरी हो जाते हैं।
- ध्यान रखें कि मीठे और गैस वाले ड्रिंक से बचें, सादा और प्राकृतिक पेय ही लें।
व्रत में सेहत का ध्यान कैसे रखें?
अगर आपको शुगर, बीपी या अन्य बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही व्रत रखें। भूखे रहने के बजाय फलाहार करें। ज्यादा देर तक खाली पेट रहने से एसिडिटी हो सकती है। रात में हल्का भोजन लेकर ही व्रत खोलें। व्रत के दिन ज्यादा मेहनत वाला काम करने से बचें ताकि शरीर पर ज्यादा दबाव न पड़े। सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी पीना फायदेमंद रहता है।
दिनभर थोड़ा-थोड़ा फल या मखाना खाते रहें, इससे कमजोरी नहीं आएगी। ज्यादा तला-भुना खाने से पेट खराब हो सकता है, इसलिए हल्का और सात्विक भोजन चुनें। अगर चक्कर या ज्यादा कमजोरी लगे तो तुरंत कुछ मीठा फल खा लें। व्रत के दौरान अच्छी नींद भी जरूरी है, इससे शरीर जल्दी थकता नहीं। सबसे जरूरी बात, व्रत श्रद्धा से रखें लेकिन अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें।
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नवरात्रि और एकादशी व्रत में खान-पान का अंतर
नवरात्रि का व्रत माता रानी यानी माता दुर्गा को समर्पित होता है और यह पूरे 9 दिनों तक चलता है। इन दिनों लोग फलाहार करते हैं और गेहूं-चावल जैसे अनाज नहीं खाते। कुट्टू, सिंहाड़ा, साबूदाना, मखाना और सेंधा नमक का ज्यादा उपयोग किया जाता है। कुछ लोग दिन में एक बार फल खाते हैं, तो कुछ दो बार हल्का व्रत भोजन लेते हैं।
वहीं एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। एकादशी में खास तौर पर चावल नहीं खाया जाता और कई लोग सिर्फ फल या दूध पर ही रहते हैं। दोनों व्रतों के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए व्रत रखने से पहले सही जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
व्रत खोलते समय क्या खाएं?
- व्रत खोलते समय जल्दबाजी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
- सबसे पहले एक गिलास पानी, नारियल पानी या हल्का शरबत लें।
- इसके बाद खजूर, केला या थोड़ा सा फल खा सकते हैं।
- फिर हल्का और सुपाच्य खाना लें, जैसे खिचड़ी या हल्की सब्जी।
- बहुत ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना तुरंत न खाएं।
- लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद भारी भोजन पेट को नुकसान पहुंचा सकता है।
- धीरे-धीरे और कम मात्रा में खाना खाएं, ताकि पाचन ठीक रहे।
व्रत में सबसे अच्छा क्या खाना चाहिए?
व्रत में हल्का और सात्विक खाना सबसे अच्छा माना जाता है। फल जैसे केला, सेब, पपीता आराम से खाए जा सकते हैं। साबूदाना, कुट्टू, सिंहाड़ा और मखाना भी अच्छे विकल्प हैं। दूध, दही और नारियल पानी शरीर को ताकत देते हैं। ज्यादा तला-भुना खाने से बचें, हल्का घर का बना खाना ही लें।
क्या व्रत में चाय या कॉफी पी सकते हैं?
कुछ लोग व्रत में चाय पीते हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा सही नहीं है। खाली पेट ज्यादा चाय पीने से एसिडिटी हो सकती है। अगर आदत है तो हल्की चाय ले सकते हैं। कॉफी कम ही पिएं, क्योंकि यह पेट में जलन कर सकती है। बेहतर है कि नारियल पानी या नींबू पानी लें।
व्रत में कमजोरी क्यों होती है और क्या करें?
कमजोरी तब होती है जब लंबे समय तक कुछ नहीं खाते। शरीर को ऊर्जा न मिलने से चक्कर आ सकते हैं। थोड़ी-थोड़ी देर में फल या मखाना खाते रहें। पर्याप्त पानी जरूर पिएं ताकि डिहाइड्रेशन न हो। अगर ज्यादा कमजोरी लगे तो मीठा फल तुरंत खा लें।
क्या व्रत में सेंधा नमक ही जरूरी है?
हाँ, अधिकतर व्रत में सामान्य नमक नहीं खाया जाता। सेंधा नमक को शुद्ध और सात्विक माना जाता है। इसी वजह से व्रत के भोजन में इसका उपयोग होता है। सामान्य नमक व्रत के नियमों में मान्य नहीं होता। हर व्रत के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए पहले जानकारी लें।
निष्कर्ष
व्रत का असली मतलब सिर्फ भूखे रहना नहीं, बल्कि मन और शरीर को शुद्ध करना है। हर व्रत के अपने नियम होते हैं, इसलिए सही जानकारी बहुत जरूरी है। नवरात्रि और एकादशी दोनों में खान-पान का तरीका थोड़ा अलग होता है। हमेशा सात्विक, हल्का और साफ भोजन ही लेना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना भी उतना ही जरूरी है, ताकि कमजोरी न आए। अगर किसी को बीमारी है तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही तरीके से व्रत रखेंगे तो सेहत भी अच्छी रहेगी और पूजा का पूरा फल भी मिलेगा।