Bhakti Marg यानी भक्ति का मार्ग, वह रास्ता है जिसमें इंसान भगवान से प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ता है। यह कोई कठिन साधना या पहाड़ों में जाकर तप करने की बात नहीं है। Bhakti Marg का मतलब है अपने दिल से भगवान को मानना, उनका नाम लेना और हर काम में उन्हें याद रखना।
हमारे जीवन में रोज़ कई परेशानियाँ आती हैं तनाव, चिंता, डर, असफलता। ऐसे समय में Bhakti Marg हमें मानसिक सहारा देता है। जब हम भगवान को अपना मानते हैं, तो हमें लगता है कि हम अकेले नहीं हैं।
Bhakti Marg का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें दिखावा नहीं होता। यहाँ केवल सच्चा मन चाहिए। चाहे आप घर में हों, ऑफिस में हों या कहीं भी अगर दिल से भगवान को याद करते हैं, तो वही भक्ति है। यह मार्ग हर उम्र के लोगों के लिए है बच्चे, युवा, बुज़ुर्ग, सभी के लिए। Bhakti Marg हमें सरल जीवन, सच्ची सोच और संतोष सिखाता है।
मीरा बाई और Bhakti Marg
राजस्थान की राजकुमारी मीरा बाई Bhakti Marg की सबसे सुंदर मिसाल मानी जाती हैं। बचपन से ही मीरा को भगवान श्रीकृष्ण से गहरा प्रेम था। कहा जाता है कि छोटी उम्र में ही उन्होंने एक छोटी सी कृष्ण मूर्ति को अपना पति मान लिया था। शादी के बाद भी उन्होंने अपना जीवन भक्ति में ही लगाया और राजमहल की सुख-सुविधाओं से ज्यादा महत्व भगवान के नाम को दिया।
मीरा के सामने कई मुश्किलें आईं। परिवार ने उनका विरोध किया, समाज ने सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने Bhakti Marg नहीं छोड़ा। वह रोज़ कृष्ण भजन गाती थीं और कहती थीं मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
इतिहास में लिखा है कि मीरा को ज़हर भी दिया गया, लेकिन उनका विश्वास इतना मजबूत था कि वह बच गईं। यह कहानी हमें बताती है कि Bhakti Marg पर चलने वाला व्यक्ति अंदर से इतना मजबूत हो जाता है कि कोई भी कठिनाई उसे तोड़ नहीं सकती।
मीरा ने महलों की जगह मंदिरों को चुना, आभूषणों की जगह तुलसी की माला पहनी और राजसी जीवन छोड़कर साधारण जीवन अपनाया। उन्होंने पूरे देश में घूम-घूमकर भजन गाए और लोगों को सिखाया कि सच्चा सुख केवल भगवान के प्रेम में है।
उनकी भक्ति में इतना बल था कि आज भी उनके भजन मंदिरों और घरों में गूंजते हैं। मीरा बाई की कहानी हमें सिखाती है कि जब प्रेम सच्चा हो और विश्वास अटल हो, तो Bhakti Marg जीवन को पूरी तरह बदल सकता है। और वो अपनी भक्ति में मगन होक बोलती है राधे कृष्ण, राधे कृष्ण। यही सब से हम सभी को सीखना चाहिये इसे धीरे-धीरे दिल से बोलें। चलते समय, बैठते समय या सोने से पहले 21 बार जपें। यह मंत्र प्रेम, शांति और भक्ति का भाव जगाता है।
Bhakti Marg मन को शांति देता है
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति तनाव से जूझ रहा है। ऐसे समय में Bhakti Marg मन को शांति देने का सबसे आसान तरीका है। जब हम रोज़ थोड़ा समय भगवान के नाम में लगाते हैं, तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। भजन सुनना, मंत्र जप करना या बस आँखें बंद करके भगवान को याद करना यह सब मन को हल्का कर देता है।
Bhakti Marg हमें सिखाता है कि हर स्थिति में भगवान पर भरोसा रखें। इससे चिंता कम होती है। जब भरोसा मजबूत होता है, तो डर अपने आप कम हो जाता है। मन की शांति से हमारी सोच भी सकारात्मक हो जाती है। हम छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करते। यही Bhakti Marg का पहला बड़ा फायदा है।
जब मन शांत रहता है, तो हमारा शरीर भी स्वस्थ रहने लगता है। डॉक्टर भी कहते हैं कि ज्यादा तनाव कई बीमारियों की वजह बनता है। Bhakti Marg तनाव को कम करने में मदद करता है, जिससे नींद अच्छी आती है और दिमाग ताज़ा महसूस करता है।
सुबह के समय अगर हम कुछ मिनट प्रार्थना या ध्यान में बिताते हैं, तो पूरा दिन बेहतर गुजरता है। ऑफिस का दबाव हो या घर की जिम्मेदारी, हम उसे सही तरीके से संभाल पाते हैं। Bhakti Marg हमें सिखाता है कि हर समस्या अस्थायी है, लेकिन भगवान का साथ स्थायी है। यही भावना मन को गहरी और सच्ची शांति देती है।
Bhakti Marg आत्मविश्वास बढ़ाता है
Bhakti Marg केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, यह आत्मबल भी देता है। जब हम भगवान पर विश्वास करते हैं, तो हमें खुद पर भी विश्वास आने लगता है। इतिहास में संत तुलसीदास जी ने भी कठिन परिस्थितियों में राम नाम का सहारा लिया। उन्होंने रामचरितमानस की रचना की, जो आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।
Bhakti Marg हमें यह सिखाता है कि मेहनत करें और परिणाम भगवान पर छोड़ दें। इससे असफलता का डर कम हो जाता है। जब व्यक्ति डर से मुक्त होता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। वह नए काम करने की हिम्मत करता है। यही कारण है कि Bhakti Marg जीवन में सफलता का रास्ता भी खोलता है।
जब इंसान Bhakti Marg पर चलता है, तो वह खुद को अकेला महसूस नहीं करता। उसे लगता है कि हर कदम पर भगवान उसका साथ दे रहे हैं। यह भावना अंदर से एक अलग ही ताकत देती है। कई बार जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब लोग साथ छोड़ देते हैं, लेकिन भक्ति करने वाला व्यक्ति टूटता नहीं है।
भगवान का नाम जपने से मन स्थिर होता है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। इंटरव्यू हो, परीक्षा हो या कोई बड़ा फैसला भक्ति से जुड़ा व्यक्ति घबराता कम है। वह सोचता है कि जो होगा अच्छा ही होगा। यही सोच उसे आगे बढ़ने की हिम्मत देती है। धीरे-धीरे यह भरोसा गहरा हो जाता है और आत्मविश्वास उसका स्वभाव बन जाता है।
Bhakti Marg रिश्तों को मजबूत करता है
भक्ति केवल भगवान से प्रेम करना नहीं सिखाती, बल्कि इंसानों से भी प्रेम करना सिखाती है। जब हम Bhakti Marg पर चलते हैं, तो हमारे अंदर दया, करुणा और क्षमा जैसे गुण आने लगते हैं। हम दूसरों की गलतियों को माफ करना सीखते हैं। घर में अगर हर व्यक्ति थोड़ा समय भक्ति में लगाए, तो माहौल शांत रहता है। झगड़े कम होते हैं और समझ बढ़ती है।
Bhakti Marg हमें सिखाता है कि हर इंसान में भगवान का अंश है। जब यह सोच आती है, तो हम किसी से नफरत नहीं करते। इससे रिश्ते मजबूत होते हैं। भक्ति हमें यह भी सिखाती है कि रिश्ते केवल शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार से निभाए जाते हैं। जब हम रोज़ भगवान का नाम लेते हैं, तो हमारा स्वभाव धीरे-धीरे नरम और समझदार बनने लगता है।
हम गुस्से में तुरंत जवाब देने के बजाय सोच-समझकर बोलना सीखते हैं। इससे छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद अपने आप कम हो जाते हैं। Bhakti Marg पर चलने वाला व्यक्ति स्वार्थ कम करता है और त्याग की भावना बढ़ाता है। वह केवल अपने बारे में नहीं सोचता, बल्कि परिवार और समाज के बारे में भी सोचता है। जब घर में आपसी सम्मान और विश्वास बढ़ता है, तो रिश्ते लंबे समय तक टिकते हैं। इस तरह Bhakti Marg केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि पारिवारिक जीवन को भी खुशहाल और मजबूत बनाता है।
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Bhakti Marg से सकारात्मक सोच आती है
Bhakti Marg इंसान की सोच बदल देता है। जो व्यक्ति पहले हर बात में परेशानी देखता था, वही अब हर स्थिति में अच्छा पक्ष देखने लगता है। भगवान पर विश्वास रखने से मन में उम्मीद बनी रहती है। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, भक्ति करने वाला व्यक्ति हार नहीं मानता।
यह सकारात्मक सोच जीवन को आसान बनाती है। समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, लेकिन उन्हें संभालने की ताकत मिलती है। Bhakti Marg हमें सिखाता है कि हर घटना के पीछे कोई न कोई सीख छुपी होती है।
जब इंसान रोज़ भगवान का नाम लेता है, तो उसके अंदर एक अलग तरह की ऊर्जा पैदा होती है। वह छोटी-छोटी बातों पर दुखी नहीं होता। अगर कोई काम बिगड़ भी जाए, तो वह यह सोचता है कि शायद भगवान ने इससे भी बेहतर कुछ उसके लिए रखा है। यही सोच उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
Bhakti Marg हमें शिकायत की जगह धन्यवाद देना सिखाता है। जब हम हर परिस्थिति में न्यवाद प्रभु कहना सीख जाते हैं, तब मन हल्का हो जाता है। धीरे-धीरे नकारात्मक विचार कम होने लगते हैं और जीवन में उजाला बढ़ने लगता है। यही सच्ची सकारात्मक सोच है।
Bhakti Marg से डर खत्म होता है
डर इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है। भविष्य का डर, असफलता का डर, बीमारी का डर यह सब मन को परेशान करता है। Bhakti Marg सिखाता है कि भगवान हर समय हमारे साथ हैं। जब यह विश्वास मजबूत हो जाता है, तो डर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
संत कबीरदास जी ने कहा था जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय। यही Bhakti Marg की ताकत है। विश्वास से भरा मन निडर हो जाता है और जीवन को खुलकर जीता है। जब व्यक्ति यह मान लेता है कि उसकी हर सांस भगवान की इच्छा से चल रही है, तो उसे अनहोनी का डर कम लगने लगता है।
Bhakti Marg हमें यह भरोसा देता है कि जो भी होगा, अच्छा ही होगा। अगर कठिन समय आता भी है, तो वह हमें मजबूत बनाने के लिए आता है। भक्ति करने वाला व्यक्ति डर को भाग्य नहीं मानता, बल्कि उसे विश्वास से बदल देता है। वह जानता है कि भगवान की कृपा से वह हर चुनौती का सामना कर सकता है। यही निडरता जीवन को सच्ची आज़ादी देती है।
Bhakti Marg जीवन में अनुशासन लाता है
जो व्यक्ति रोज़ पूजा करता है, वह अपने समय का सही उपयोग करना सीख जाता है। सुबह जल्दी उठना, साफ-सफाई रखना, नियमित पूजा करना यह सब अनुशासन सिखाता है। Bhakti Marg हमें सिखाता है कि जीवन में नियम जरूरी हैं। जब जीवन में अनुशासन आता है, तो सफलता भी पास आती है।
इस तरह भक्ति केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन को भी बेहतर बनाती है।जब इंसान रोज़ एक तय समय पर भगवान का नाम लेता है, तो उसके अंदर स्थिरता आने लगती है। वह टालमटोल की आदत से दूर होता है। Bhakti Marg हमें यह समझाता है कि हर काम समय पर करना भी एक तरह की साधना है। जैसे हम पूजा का समय नहीं छोड़ते, वैसे ही हमें अपने काम, पढ़ाई और जिम्मेदारियों को भी नहीं छोड़ना चाहिए।
धीरे-धीरे यह आदत हमारे पूरे दिनचर्या को सुधार देती है। खाने, सोने और काम करने का समय संतुलित हो जाता है। मन इधर-उधर भटकने के बजाय एक लक्ष्य पर टिकता है। Bhakti Marg हमें भीतर से संयम और नियंत्रण सिखाता है। यही अनुशासन आगे चलकर जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनता है।
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Bhakti Marg से संतोष मिलता है
आज हर व्यक्ति अधिक पाने की दौड़ में लगा है। लेकिन Bhakti Marg हमें संतोष सिखाता है। भक्ति करने वाला व्यक्ति मेहनत करता है, लेकिन लालच नहीं करता। उसे जो मिलता है, उसमें खुश रहना सीखता है। संतोष से मन हल्का रहता है और जीवन सरल बनता है। Bhakti Marg का यह फायदा इंसान को अंदर से अमीर बना देता है।
जब इंसान हर चीज़ को भगवान की कृपा मानने लगता है, तो शिकायतें कम होने लगती हैं। वह दूसरों से अपनी तुलना करना छोड़ देता है। Bhakti Marg सिखाता है कि हर किसी की किस्मत और समय अलग होता है। इसलिए जलन और असंतोष की जगह कृतज्ञता आ जाती है।
संतोष का मतलब यह नहीं कि इंसान आगे बढ़ना छोड़ दे। इसका मतलब है कि वह मेहनत करे, लेकिन मन में शांति बनाए रखे। जब दिल में धन्यवाद का भाव होता है, तो छोटी-छोटी खुशियाँ भी बड़ी लगती हैं। Bhakti Marg हमें यही एहसास कराता है कि असली दौलत मन की शांति है, न कि केवल धन और वस्तुएँ।
Bhakti Marg से सेवा भावना बढ़ती है
भक्ति का मतलब केवल पूजा नहीं, बल्कि सेवा भी है। जब हम भगवान से प्रेम करते हैं, तो उनके बनाए लोगों से भी प्रेम करते हैं। जरूरतमंद की मदद करना, भूखे को खाना देना यह भी Bhakti Marg है। सेवा से मन में खुशी मिलती है। यह खुशी किसी भी धन से बड़ी होती है। Bhakti Marg हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है जो दूसरों के काम आए।
जब इंसान Bhakti Marg पर चलता है, तो उसके अंदर अपने आप दूसरों के लिए कुछ करने की भावना जागने लगती है। वह सोचता है कि अगर भगवान ने मुझे कुछ दिया है, तो मैं उसमें से थोड़ा दूसरों के साथ भी बाँटूं। यही असली सेवा है।
सेवा करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं है। एक मीठा बोल, किसी दुखी को सहारा देना, किसी बुज़ुर्ग को सड़क पार करवाना ये सब भी सेवा है। जब हम दिल से किसी की मदद करते हैं, तो मन को अलग ही सुकून मिलता है।
धीरे-धीरे सेवा हमारी आदत बन जाती है। तब हम हर इंसान में भगवान का रूप देखने लगते हैं। यही Bhakti Marg की खूबसूरती है यह हमें केवल भगवान से नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से जोड़ देता है।
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Bhakti Marg से अहंकार कम होता है
अहंकार इंसान को अकेला कर देता है। लेकिन Bhakti Marg सिखाता है कि सब कुछ भगवान की कृपा से है। जब यह समझ आती है, तो घमंड अपने आप खत्म होने लगता है। विनम्रता से इंसान का सम्मान बढ़ता है। Bhakti Marg व्यक्ति को सरल और नम्र बनाता है।
जब व्यक्ति भक्ति करता है, तो उसे एहसास होता है कि जो भी ताकत, पैसा, ज्ञान या सफलता उसे मिली है, वह सिर्फ उसकी मेहनत से नहीं बल्कि भगवान की कृपा से भी है। यह सोच उसके अंदर से घमंड को धीरे-धीरे कम कर देती है।
अहंकार में इंसान दूसरों को छोटा समझता है, लेकिन Bhakti Marg सिखाता है कि हर व्यक्ति बराबर है। जब हम नम्र रहते हैं, तो लोग हमारे करीब आना पसंद करते हैं। रिश्ते अच्छे बनते हैं और सम्मान भी मिलता है।
भक्ति हमें झुकना सिखाती है, और जो झुकना सीख जाता है, वही असली ऊँचाई पाता है। Bhakti Marg इंसान को अंदर से इतना साफ बना देता है कि उसके व्यवहार में मिठास आ जाती है। यही सच्ची भक्ति का असर है।
Bhakti Marg जीवन को दिशा देता है
कई लोग जीवन में लक्ष्य को लेकर भ्रमित रहते हैं। Bhakti Marg उन्हें सही दिशा देता है। जब मन शांत होता है, तो सही निर्णय लेना आसान हो जाता है। भगवान पर भरोसा रखने से व्यक्ति गलत रास्तों से बचता है। Bhakti Marg जीवन को सही दिशा देने वाला प्रकाश है।
जब इंसान भक्ति से जुड़ता है, तो उसके अंदर साफ सोच विकसित होती है। वह जल्दबाजी में फैसले नहीं करता, बल्कि ठहरकर सोचता है। आज की लाइफ में लोग जल्दी पैसा, नाम और शोहरत पाने के चक्कर में गलत रास्ता चुन लेते हैं। लेकिन Bhakti Marg हमें सिखाता है कि सही रास्ता थोड़ा लंबा हो सकता है, पर अंत में वही सच्ची सफलता देता है।
भक्ति करने से मन में एक अंदरूनी आवाज़ मजबूत होती है, जो सही और गलत का फर्क समझाती है। जब हम रोज भगवान का नाम लेते हैं, तो हमारे विचार भी धीरे-धीरे सकारात्मक हो जाते हैं। इससे करियर, रिश्ते और जीवन के बड़े फैसले लेना आसान हो जाता है। Bhakti Marg ऐसा दीपक है, जो अंधेरे समय में भी रास्ता दिखाता है और भटकने से बचाता है।
Bhakti Marg से मानसिक शक्ति मिलती है
भक्ति करने वाला व्यक्ति मुश्किल समय में भी टूटता नहीं है। वह हर समस्या को भगवान की परीक्षा मानता है। इस सोच से मानसिक शक्ति बढ़ती है। Bhakti Marg इंसान को मजबूत बनाता है। जीवन में हर किसी के सामने कभी न कभी कठिन समय आता है। कभी नौकरी की टेंशन, कभी परिवार की चिंता, तो कभी स्वास्थ्य की परेशानी।
ऐसे समय में जो व्यक्ति Bhakti Marg पर चलता है, वह घबराता नहीं है। उसे विश्वास होता है कि यह समय भी गुजर जाएगा और भगवान उसके साथ हैं। भक्ति से मन में धैर्य आता है। जब हम रोज थोड़ा समय पूजा, प्रार्थना या भजन में लगाते हैं, तो अंदर से एक ताकत महसूस होती है। यह ताकत हमें टूटने नहीं देती।
हम हालात से भागते नहीं, बल्कि उनका सामना करते हैं। Bhakti Marg हमें सिखाता है कि हर समस्या एक सीख है। यही सोच मानसिक मजबूती देती है। धीरे-धीरे इंसान अंदर से इतना मजबूत हो जाता है कि बड़ी से बड़ी परेशानी भी उसे हिला नहीं पाती।
Bhakti Marg और सच्ची खुशी
भक्ति में जो आनंद मिलता है, वह बाहरी चीज़ों से नहीं मिलता। नई गाड़ी, नया मोबाइल या बड़ी नौकरी कुछ समय के लिए खुशी दे सकते हैं, लेकिन वह खुशी ज्यादा दिन टिकती नहीं।
भजन गाते समय या मंदिर में बैठते समय जो शांति मिलती है, वही सच्ची खुशी है। जब हम आँखें बंद करके भगवान का नाम लेते हैं, तो मन की भागदौड़ धीरे-धीरे कम हो जाती है। अंदर से एक हल्कापन महसूस होता है, जैसे दिल का बोझ उतर गया हो।
Bhakti Marg हमें अंदर की खुशी से जोड़ता है। यह हमें सिखाता है कि असली सुख बाहर नहीं, हमारे मन के अंदर है। जब हम भगवान पर भरोसा करते हैं, तो छोटी-छोटी बातों में भी खुशी मिलने लगती है।
यह खुशी स्थायी होती है क्योंकि यह किसी चीज़ पर निर्भर नहीं होती। हालात अच्छे हों या थोड़े मुश्किल, भक्ति करने वाला इंसान अंदर से खुश रह सकता है। यही Bhakti Marg की सबसे बड़ी ताकत है बिना किसी शर्त के सच्ची और टिकाऊ खुशी।
Bhakti Marg कैसे शुरू करें?
Bhakti Marg शुरू करना बहुत आसान है। इसके लिए बड़े नियम या कठिन साधना की जरूरत नहीं है। बस एक सच्चा मन और थोड़ा सा समय चाहिए। रोज़ सुबह 5 से 10 मिनट भगवान का नाम लें। उठते ही मोबाइल देखने की जगह दो मिनट राम, कृष्ण या अपने इष्ट देव का नाम लें। इससे दिन की शुरुआत सकारात्मक होती है।
एक छोटा मंत्र जपें या भजन सुनें। अगर समय कम हो, तो काम करते-करते भी मन में भगवान को याद कर सकते हैं। खाना बनाते समय, चलते समय या सफर में भी भक्ति की जा सकती है।
धीरे-धीरे भक्ति जीवन का हिस्सा बन जाएगी। जैसे हम रोज़ खाना खाते हैं, वैसे ही रोज़ थोड़ा समय भगवान के लिए निकालना आदत बन जाएगा। यही छोटी-छोटी शुरुआत आगे चलकर गहरी भक्ति में बदल जाती है और जीवन को शांत और सुखी बना देती है।
Bhakti Marg क्या है और इसे कैसे अपनाएँ?
Bhakti Marg भगवान से प्रेम और विश्वास का रास्ता है। इसे अपनाने के लिए बड़े नियम जरूरी नहीं हैं। रोज़ थोड़ा समय भगवान के नाम में लगाना काफी है। भजन, मंत्र जप या प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं। सबसे जरूरी है सच्चा मन और विश्वास।
क्या Bhakti Marg केवल बुज़ुर्गों के लिए है?
नहीं, Bhakti Marg हर उम्र के लोगों के लिए है। बच्चे, युवा और बड़े सभी इसे अपना सकते हैं। भक्ति के लिए उम्र नहीं, भावना जरूरी होती है। स्टूडेंट भी पढ़ाई के साथ भक्ति कर सकते हैं। यह जीवन के हर पड़ाव पर सहारा देता है।
Bhakti Marg कठिन समय में कैसे मदद करता है?
भक्ति हमें अंदर से मजबूत बनाती है। कठिन समय में भरोसा टूटने नहीं देती। हम हर समस्या को सीख की तरह देखना सीखते हैं। डर और घबराहट कम होने लगती है। भगवान पर विश्वास हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देता है।
निष्कर्ष
Bhakti Marg केवल धार्मिक रास्ता नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। यह हमें शांति, संतोष, आत्मविश्वास और सही दिशा देता है। मीरा बाई और संतों की कहानियाँ साबित करती हैं कि सच्ची भक्ति जीवन बदल सकती है। अगर हम रोज़ थोड़ा समय Bhakti Marg को दें, तो जीवन सरल और सुखी बन सकता है। Bhakti Marg हमें सिखाता है कि हर हाल में भगवान पर भरोसा रखें और मेहनत करते रहें। जब मन में विश्वास होता है, तो मुश्किल समय भी आसान लगने लगता है।